சனி, மார்ச் 02, 2013

shiksha

आज  स्वतंत्र  भारत में शिक्षा के क्षेत्र में आर्थिक असमानता  के कारण अभिभावकों को अधिक 
कष्टों का सामना करना पड़ता है. 

विद्यालय प्रवेश =
प्रवेश परीक्षा =असफल छात्र=प्रवेश -कैसे?
सिफारिश/दान/
मतलब  माता-पिता सिफारिश के लिए अपने जान-पहचान को तंग करते हैं . इनकार करनेपर  जिसमें सिफारिश करने की क्षमता हैं,उनको नालायक या दुश्मन  समझते हैं .रिश्तेदार में शत्रुता बढ़ती है .

फरवरी में ही प्रवेश -परीक्षा,परिणाम हो जाता है ,जिनमें सिफारिश करने की काबिलियत या अधिकार है,उनको 
अपराधी के समान झूठ बोलना या छिपना पड़ता है ,
यह केवल उच्च शिक्षा के लिए है तो ठीक है .
L.K.G   से  पांचवीं कक्षा तक  यह दशा दयनीय है,चिंताजनक है .